गलत भक्ति और नास्तिकता पर

मनुष्य जन्म प्राप्त करके जो व्यक्ति सदभक्ति नहीं करता या ग़लत साधनाओं को करता है नास्तिकता कीओर अग्रसर है वह कुत्ते, गधे आदि-आदि की योनि में कष्ट उठाता है। कुत्ता रात्रि में आसमान की ओर मुख करके रोता है।
सतभक्ति मर्यादा में रहकर करने से कैंसर, एड्स जैसी बीमारी भी ठीक होती हैं।
सतभक्ति करने से नशा अपने आप छूट जाता है। शराब, तम्बाकू तथा अन्य नशे के प्रति घृणा हो जाती है।
संत रामपाल जी महाराज की बताई सतभक्ति से आज लाखों परिवार रोगों से मुक्त होकर सुखी जीवन जी रहे है।
पूर्ण संत के सत्संग सुनने से चरित्र निर्माण होता है जिससे स्वछ समाज व देश का निर्माण होता है।

पूर्ण गुरु के लक्षण
पूर्ण संत सर्व वेद-शास्त्रों का ज्ञाता होता है। 
दूसरे वह मन-कर्म-वचन से यानि सच्ची श्रद्धा से केवल एक परमात्मा समर्थ की भक्ति स्वयं करता है तथा अपने अनुयाईयों से करवाता है। 
तीसरे वह सब अनुयाईयों से समान व्यवहार (बर्ताव) करता है।
चौथे उसके द्वारा बताया भक्ति
कर्म वेदों में वर्णित विधि के अनुसार होता है।
संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग प्रवचनों से ही मोक्ष संभव है एवं व्यक्ति सभी प्रकार के नशे एवं बुराईयों को त्यागकर सच्चे जीवन की राह पर चलने को प्रेरित होगा !